सारे काम पड़े अधूरे
चलने की तैयारी
जीवन की नैया कब डगमग हो
ये किसने जानी
फ़िर कैसी इंतजारी?
जो करना है
वो कर गुजरो
नींद छोड़कर रण में उतरो
अरमानो की आग तेज हो
लक्ष्य सामने खड़ा बेध दो
कल नही
ये काम आज हो
क्यों आलस भरी लाचारी ?
घिरा हुआ क्यों बैठा घर मे
ये कैसी नादानी
जज्बातों के पंख उगे हों
सुन्दर सपने आँख भरे हों
पग में तेरे वेग भरा हो
मन बुद्धि का योग बना हो
फ़िर क्यों करता देरी?
गाँव-गाँव और गली-गली में
मोत लगाती फेरी